अपनी गलती मानने का धैर्य रखते हो, तो गांधी हो तुम|
दुसरों के दृष्टिकोन से देख पाते हो, तो गांधी हो तुम|
किसिका दर्द समझने की क्षमता रखते हो, तो गांधी हो तुम|
सच बोलने से अगर हिचकीचाते नही, तो गांधी हो तुम|
सबको साथ ले के चल सकते हो, तो गांधी हो तुम|
अपनी गलती मानने का धैर्य दिखा सकते हो, तो गांधी हो तुम|
अपने विचार समय अनुसार बदलना चाहते हो, बदल सकते हो, तो गांधी हो तुम|
लाठी और गोली को बिना डरे, अपने मार्गपर चल सकते हो, तो गांधी हो तुम|
Need और Greed के बीच का अंतर समझ सकते हो, तो गांधी हो तुम|
तुम्हारे संपर्क में आये लोहे का सोना बना सकते हो, अगर ऐसे पथ्थर हो तुम, तो गांधी हो तुम|
तुम गांधी से थोडा भी प्यार करते हो, तो खुद को भी प्यार करते हो तुम|
तुम गांधी से थोडी भी नफरत करते हो, तो खुद से भी उतनी ही नफरत करते हो तुम|
पागल है वो दुनिया, जो सिर्फ मोहनदासजी को गांधी समझती है,
हर कोई, अपने अंदर एक गांधी ले के घुम रहा है, सिर्फ पहचनाने की जरुरत है।
हर कोई, अपने अंदर एक गांधी ले के घुम रहा है, सिर्फ पहचनाने की जरुरत है।
आज, 30 जनवरी तो मोहनदासजी की पुण्यतिथी है, गांधी तो कभी मरते नही...
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